Supreme Court On Aravalli Range Controversy: अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है। पर्यावरण प्रेमी और देश के आम लोग इसे अरावली पर्वतमाला को खत्म करने की शुरुआत कह रहे हैं। इसे लेकर देश में कई जगह प्रदर्शन भी कर रहे हैं। हालांकि मोदी सरकार साफ कह चुकी है कि 98% अरावली सुरक्षित है। साथ ही राजस्थान की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार पर भी निशाना साधा है। देश में मचे अरावली पर संग्राम के बीच सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया है। अरावली हिल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार (29 दिसंबर) को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लिया है। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच इस पूरे विवाद की सुनवाई करेगी।
वहीं कांग्रेस का आरोप है कि बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति देने के लिए अरावली की परिभाषा में बदलाव किया गया है। हालांकि, सरकार ने कांग्रेस के इस दावे को पूरी तरह से खारिज किया है। हंगामा होने के बाद केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों को अरावली में किसी भी प्रकार के नए खनन पट्टे देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किया है।
- Supreme Court On Aravalli Range Controversy: अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है। पर्यावरण प्रेमी और देश के आम लोग इसे अरावली पर्वतमाला को खत्म करने की शुरुआत कह रहे हैं। इसे लेकर देश में कई जगह प्रदर्शन भी कर रहे हैं। हालांकि मोदी सरकार साफ कह चुकी है कि 98% अरावली सुरक्षित है। साथ ही राजस्थान की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार पर भी निशाना साधा है। देश में मचे अरावली पर संग्राम के बीच सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया है। अरावली हिल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार (29 दिसंबर) को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लिया है। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच इस पूरे विवाद की सुनवाई करेगी।
- क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
केंद्र सरकार ने आईसीएफआरई (ICFRE) को अतिरिक्त क्षेत्रों की पहचान करने को कहा गया है। अरावली के क्षेत्रों में भी खनन को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने अरावली की अखंडता बचाने का वादा किया है। पुरानी खदानों को भी कोर्ट के आदेशों का पालन करना होगा। सरकार का लक्ष्य अनियमित माइनिंग को पूरी तरह रोकना है। मरुस्थलीकरण रोकने के लिए अरावली का बचना बहुत जरूरी है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जबकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस नियम से अरावली का 90% हिस्सा खत्म हो सकता है। केंद्र सरकार ने हालांकि नए माइनिंग पट्टों पर रोक लगा दी है। लेकिन अब मामला देश की सबसे बड़ी अदालत के पास है। सोमवार की सुनवाई अरावली के अस्तित्व के लिए बहुत ही निर्णायक साबित हो सकती है।
दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक
अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है जो करीब 700 किमी लंबी है। यह दिल्ली-एनसीआर को थार रेगिस्तान की धूल और मरुस्थलीकरण से बचाने वाली एक प्राकृतिक ढाल हैष। हाल ही में सरकार की 100 मीटर ऊंचाई वाली नई परिभाषा पर भारी विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद अरावली को लेकर कई इलाकों में प्रदर्शन भी देखने को मिले। हालांकि केंद्र सरकार लगातार इस मामले को लेकर स्पष्ट रूप से कह रही है कि अरावली को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है।
