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Satyoday Samachar > Blog > विश्व > Israel-Syria Tension: इजरायल को काबू करो! सीरिया के नए नेता अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने अमेरिका को भेजा मैसेज
विश्व

Israel-Syria Tension: इजरायल को काबू करो! सीरिया के नए नेता अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने अमेरिका को भेजा मैसेज

Satyoday Samachar
Last updated: January 4, 2025 5:36 pm
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Satyoday Samachar
7 Min Read
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इजरायल और सीरिया के बीच बफर ज़ोन, विशेष रूप से माउंट हर्मोन के आसपास, तनाव फिर से उभर रहा है, जिससे मध्य पूर्व में संभावित संघर्ष की स्थिति बन रही है.

Israel-Syria Tension: इजरायल और सीरिया के बीच तनाव फिर से उभर रहा है, जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक सीरिया के नए नेता अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने संयुक्त राज्य अमेरिका से इजरायल पर दबाव डालने का आग्रह किया है ताकि वह सीरिया के बफर ज़ोन, जिसमें माउंट हर्मोन भी शामिल है, से पीछे हट जाए. यह कदम इजरायली मीडिया में सामने आया है और इजरायल-सीरिया संबंधों की नाजुकता को उजागर करता है, जिससे संभावित संघर्ष का खतरा बढ़ गया है. हालांकि, इजरायली अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस मामले पर कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है.

अबू मोहम्मद अल-जुलानी की तरफ से अमेरिका से की गई यह मांग सीरिया की कूटनीति में बदलाव का संकेत देती है. सत्ता संभालने के बाद से उन्होंने उन सीरियाई क्षेत्रों को फिर से हासिल करने की मांग की है जो इजरायल के कब्जे में हैं. इस बार उनका ध्यान बफर ज़ोन पर है, जो 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के बाद स्थापित एक अर्धसैनिक क्षेत्र है, जो दोनों देशों के बीच शत्रुता को कम करने के लिए बनाया गया था. इस क्षेत्र में माउंट हर्मोन का सीरियाई हिस्सा भी शामिल है, जो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.

अमेरिका से मध्यस्थता करने आग्रह
अल-जुलानी का अमेरिका से मध्यस्थता करने का यह आग्रह यह दर्शाता है कि सीरिया का नेतृत्व अब अपने क्षेत्रीय विवादों को लेकर अधिक आक्रामक हो सकता है. अल-जुलानी, जिन्हें कभी अल-कायदा से जुड़े होने के कारण अमेरिका द्वारा वांछित घोषित किया गया था, हाल ही में सीरिया के नेता बने हैं. हालाँकि उन्होंने अपने पिछले चरमपंथी संबंधों से दूरी बनाने की कोशिश की है, लेकिन उनके नेतृत्व को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी भी संदेह बना हुआ है, खासकर इजरायल में, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे के रूप में देखा जाता है.

बफर ज़ोन क्यों है महत्वपूर्ण?
बफर ज़ोन का सैन्य और रणनीतिक महत्व बहुत बड़ा है. विशेष रूप से माउंट हर्मोन एक ऐसा स्थान है जहां से बड़े क्षेत्रों पर नजर रखी जा सकती है, जिसमें सीरियाई राजधानी दमिश्क भी शामिल है. 1967 के युद्ध के बाद से इजरायल ने इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखी है और इसे अपनी सुरक्षा के लिए अनिवार्य मानता है.

इसके विपरीत सीरिया इस क्षेत्र और माउंट हर्मोन को अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है. दशकों से, सीरियाई नेताओं ने इन क्षेत्रों की वापसी की मांग की है, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली है. अबू मोहम्मद अल-जुलानी की इस मुद्दे पर फिर से ध्यान केंद्रित करने से यह संकेत मिलता है कि सीरिया का नया प्रशासन अपनी विदेश नीति में और अधिक आक्रामक रुख अपना सकता है, जिससे सैन्य संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है.

इजरायल की प्रतिक्रिया सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
इजरायली अधिकारियों ने माउंट हर्मोन के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. एक वरिष्ठ इजरायली सुरक्षा अधिकारी ने कान न्यूज को बताया कि इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर अभी तक उन्हें कोई औपचारिक संदेश प्राप्त नहीं हुआ है. इजरायल की सेना ने लंबे समय से बफर ज़ोन में अपनी उपस्थिति बनाए रखी है, खासकर माउंट हर्मोन के आसपास. यह क्षेत्र सीरिया और हिज़्बुल्लाह जैसे दुश्मनों से बचाव के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा क्षेत्र के रूप में कार्य करता है. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने माउंट हर्मोन को “इजरायल की आंख” कहा है, जिससे दमिश्क पर नजर रखी जा सकती है.

इजरायल को बफर ज़ोन से हटाने की कोशिश
सीरिया या उसके सहयोगी इजरायल को बफर ज़ोन से हटाने की कोशिश करते हैं, तो इससे सैन्य टकराव हो सकता है. हाल के वर्षों में, इजरायली सेना ने सीरिया और ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए हैं ताकि अपनी सीमाओं के निकट किसी भी खतरे को रोका जा सके. यह तनावपूर्ण स्थिति क्षेत्र में शांति की नाजुकता को उजागर करती है.

सीरियाई नेतृत्व के मिले-जुले संदेश
अल-जुलानी के आक्रामक रुख के बावजूद, अन्य सीरियाई अधिकारियों ने कुछ नरम संदेश दिए हैं. दमिश्क के नए गवर्नर माहेर मारवान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि सीरिया इजरायल या किसी अन्य देश के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखता है. मारवान ने सुझाव दिया कि बफर ज़ोन में इजरायल की गतिविधियां सुरक्षा कारणों से हो सकती हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस मुद्दे को बातचीत के माध्यम से हल किया जा सकता है. मारवान के बयान अल-जुलानी के आक्रामक रुख से अलग हैं, जो सीरियाई नेतृत्व के भीतर आंतरिक विभाजन को दर्शाते हैं. जहां कुछ गुट कूटनीति की वकालत कर रहे हैं, वहीं अन्य गुट सीरियाई क्षेत्र को पुनः प्राप्त करने के लिए अधिक आक्रामक रणनीतियों की तैयारी कर सकते हैं.

 सीरिया की नई सरकार को मान्यता मिलने की संभावना
इस स्थिति को और जटिल बनाने वाला कारक यह है कि अमेरिका ने सीरिया की नई सरकार को मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हाल की रिपोर्टों के अनुसार, बाइडन प्रशासन अल-जुलानी की सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता देने पर विचार कर रहा है. यह कदम अमेरिका की पिछले नीतियों से एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा, जो आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघनों के मुद्दों पर आधारित रही हैं. अगर अमेरिका सीरिया की नई सरकार को मान्यता देता है, तो इससे इजरायल और सीरिया के बीच शांति समझौते की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि, यह निर्णय सावधानीपूर्वक लिया जाएगा, क्योंकि अल-जुलानी को समर्थन देने से इजरायल और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों से विरोध का सामना करना पड़ सकता है.

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