श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ द्वितीय दिवस।
मानव जीवन का परम कर्तव्य मरण का सुधार – पं अनिल शुक्ला।
सारंगढ़/ बिलाईगढ़ – पावन नगर बिलाईगढ़ के धाराशिव रोड में प्रतिष्ठित देवांगन परिवार डाॅ दिवाकर देवांगन द्वारा संकल्पित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस के सत्र में व्यास पीठ में विराजमान आचार्य पं अनिल शुक्ला जी बसहा वाले द्वारा भागवत श्रवण का विधान क्या अपनाना चाहिए इस संदर्भ में विस्तृत वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि भागवत श्रवण हमेशा श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए, श्रद्धा अपार हो लेकिन सामर्थ्य न हो तो कर्ज लेकर भागवत श्रवण नहीं होना चाहिए वही सामर्थ्य अपार हो लेकिन श्रद्धा न हो तो कृपणता के युक्त होकर भी श्रवण नहीं होना चाहिए।
आगे कथा को विस्तार देते हुए आचार्य श्री द्वारा व्यास जी को भागवत कथा की प्राप्ति नारद जी से कैसे हुई इस संदर्भ में नारद जी के पूर्व जन्म की कथा का विस्तृत वर्णन किया गया, आगे इस कथा के प्रथम श्रोता राजा परीक्षित के जन्म से लेकर उनके श्रापित होने तक की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन सुनाया गया।
जब राजा परीक्षित श्रापित होकर राजपाठ का त्याग करके गंगातट पर निवास किए।वहीं परमहंस शुकदेव जी को प्राप्त करके उनकी पहली जिज्ञासा प्रगट हुई कि गुरूदेव सदा सर्वत्र एक मानव तन धारी जीव का परम कर्तव्य क्या होना चाहिए? तब शुकदेव कहते हैं कि राजा परीक्षित प्रत्येक जीव का यही परम कर्तव्य होना चाहिए कि भक्ति के द्वारा , ज्ञान के द्वारा या योग के द्वारा अंतिम समय में मुख से राम का नाम निकल जाय या फ़िर स्मृति में नारायण आ जाय यही मानव जीवन का परम कर्तव्य है ।
मानव जीवन सिर्फ मरण के सुधार के लिए बना है और जो व्यक्ति इस परम कर्तव्य का निर्वहन प्रतिक्षण करते हुए चलते है उन्हीं का मरण सुधरता है।
भागवत कथा श्रवण हेतु भक्तों की भीड़ निरंतर बढ़ रही है आयोजक परिवार द्वारा श्रवण हेतु पधारे भक्तों के लिए भोजन भंडारे की दिव्य व्यवस्था की गई है तथा नगर व आसपास क्षेत्र के भक्तों से कथा श्रवण हेतु आग्रह किया गया है।
