RBI Governor Malhotra Economic Policy Update: रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने कार्यकाल के पहले साल के पूरा होने से पहले देश की आर्थिक स्थिति पर कई अहम बिंदुओं पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी, तब ग्लोबल स्तर पर मंदी का खतरा, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन का टूटना, ये तीनों बड़े संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़े थे.
मल्होत्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय कंपनियों की बैलेंस शीट पिछले कुछ वर्षों में अधिक मजबूत हुई है. कंपनियों का कैश फ्लो और मुनाफा दोनों बढ़ा है, जिससे आने वाले समय में तेज विकास दर बनाए रखने के लिए एक ठोस आधार तैयार हुआ है. उन्होंने कहा कि भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर आज उतना सक्षम है, जितना इससे पहले शायद ही कभी रहा हो.
अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ को लेकर उठ रहे सवाल पर गवर्नर ने साफ कहा कि इनका भारत पर बहुत मामूली असर होगा. उन्होंने बताया कि भारत की निर्यात संरचना इतनी विविध है कि इस तरह के बाहरी दबाव बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं पहुंचा सकते. “हमारी अर्थव्यवस्था काफी हद तक आत्मनिर्भर और मजबूत है,” उन्होंने कहा.
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बहस तेज है कि भारत इसे कब स्वीकार करेगा. इस पर गवर्नर ने बिल्कुल स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि भारत जैसे संप्रभु देश की नीतियां अमेरिका या किसी अन्य देश की राह देखकर तय नहीं होतीं. उन्होंने दो टूक कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा के रूप में मान्यता देने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है और RBI अभी भी इसे लेकर अत्यंत सतर्क है.
इसके विपरीत, RBI सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है. मल्होत्रा ने कहा कि CBDC ऐसा माध्यम बनेगा जिस पर नागरिक वैसा ही भरोसा कर सकेंगे, जैसा पारंपरिक नोटों पर करते हैं.
उन्होंने बताया कि यह सीमा पार भुगतान को अधिक सरल और सस्ता बनाएगा, लेकिन यह अभी शुरुआती चरण में है और इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अन्य देश इसे कितनी तेजी से अपनाते हैं.
गवर्नर ने बैंक मर्जर को भी देश के बैंकिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक कदम बताया. उन्होंने कहा कि यदि सरकार बड़े बैंकों के विलय का प्लान लाती है, तो RBI उसे पूरा समर्थन देगा.
बड़े बैंकिंग संस्थान अधिक सुविधाओं, बेहतर तकनीक और सस्ते कर्ज उपलब्ध कराने में सक्षम होते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब छोटे बैंकों के महत्व का खत्म हो जाना नहीं है; भारत जैसे विशाल देश में छोटे बैंक भी उतने ही आवश्यक हैं.
रुपए में हाल ही की कमजोरी पर उन्होंने कहा कि RBI कभी भी किसी निश्चित स्तर का लक्ष्य नहीं बनाता. हमारा उद्देश्य सिर्फ अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कम करना है. उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 8 महीनों में रुपए ने डॉलर के मुकाबले 4.6% तक कमजोरी दिखाई है, जो सामान्य से अधिक है, पर इसका कारण जियो-पॉलिटिकल दबाव और बाहरी टैरिफ हैं, न कि घरेलू कमजोरी.
RBI Governor Malhotra Economic Policy Update: अंत में, क्रिप्टो को लेकर फिर से पूछे गए सवाल पर उन्होंने दोहराया कि भारत की नीतियां “ट्रेंड फॉलो” नहीं करतीं. फिलहाल क्रिप्टो को वैध मुद्रा मानने का कोई विचार नहीं है, और RBI की प्राथमिकता सुरक्षित, नियंत्रित और विश्वसनीय डिजिटल करेंसी की दिशा में काम करना है.
ऐसे समय में RBI ने अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने से लेकर रेपो रेट में 1% की कटौती जैसे निर्णायक कदम उठाए, जिससे ग्रोथ की गति सुरक्षित रखी जा सकी.
