Russia India Oil Trade US Sanctions: अमेरिका ने एक बार फिर से रूस से भारत की तेल खरीद पर प्रतिबंधों का डंडा चलाया है। अमेरिका और ब्रिटेन ने रूसी तेल की ढुलाई करने वाले टैंकरों पर लिमिट लगाई है। इन टैंकरों से तेल भारत और चीन को जाता था। इससे पहले अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने कई बार भारत को गीदड़भभकी दी थी।
हाइलाइट्स
- बाइडन ने अपने कार्यकाल के दौरान रूस के साथ संबंधों को लेकर भारत को डराने की कोशिश की
- बाइडन प्रशासन ने अपने कई बड़े अधिकारियों को भारत भेजा और उन्होंने गीदड़भभकी भी दी
- इससे बात नहीं बनी तो अमेरिका ने रूस को लक्ष्य करके भारत के खिलाफ कई प्रतिबंध भी लगाए
अमेरिका ने तेल टैंकरों पर यह प्रतिबंध तब लगाया है जब साल 2022 में जी 7 देशों ने रूसी तेल पर प्राइस लिमिट लगाई और यूक्रेन युद्ध को देखते हुए रूसी तेल यूरोप से निकल एशिया की तरफ आने लगा। भारत और चीन ने रेकॉर्ड पैमाने पर रूसी तेल खरीदा। अमेरिका ने जो प्रतिबंध लगाए हैं, उसका कुछ असर ईरानी तेल पर भी पड़ेगा। तेल के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और चीन को अब पश्चिम एशिया, अफ्रीका और अमेरिका से तेल का आयात बढ़ाना होगा। इससे भारत में तेल की ढुलाई में आने वाला खर्च बढ़ेगा और इससे बाजार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत और चीन ने फेल की अमेरिका की चाल
अमेरिका को यह प्रतिबंध लगाने से दोहरा फायदा हो रहा है। एक तरफ रूसी तेल की खरीद भारत में कम होगी, वहीं अमेरिका ज्यादा पैमाने पर अपना तेल भारत को बेच सकेगा। असल में अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन यूक्रेन युद्ध में बुरी तरह फेल हुए। बाइडन की कोशिश थी कि किसी तरह से पुतिन को झुकाया जा सके और यूक्रेन में जंग को रुकवाई जा सके। बाइडन का यह प्लान फेल हो गया। भारत और चीन ने खुलकर रूस से तेल खरीदा और इससे दुनिया को भी बड़ा फायदा हुआ। यूक्रेन युद्ध के बाद भी दुनिया में तेल की कीमतें नहीं बढ़ीं।
इसके बाद बाइडन ने जाते-जाते अब ब्रिटेन के साथ मिलकर रूसी ऊर्जा क्षेत्र के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया। रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इन प्रतिबंधों की आलोचना की है। रूस ने कहा कि यह अमेरिका की रूसी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की चाल है। उसने कहा कि अमेरिका के इस कदम से वैश्विक बाजार में खतरा बढ़ेगा। रूस ने कहा कि वह बड़े तेल और गैस प्राजेक्ट पर काम करना जारी रखेगा। अमेरिका ने जो नए प्रतिबंध लगाए हैं, उससे 143 टैंकर प्रभावित होंगे जो 53 करोड़ बैरल रूसी तेल पिछले साल लेकर गए थे।
बाइडन ने जाते-जाते ट्रंप को फंसाया ?
यह आंकड़ा रूस के कुल समुद्र के रास्ते जाने वाले तेल का 42 फीसदी है। पिछले साल भारत के रूस से तेल आयात में 36 फीसदी की तेजी आई थी। रूसी तेल पर नए प्रतिबंध लगने के बाद से ही दुनिया में तेल के दामों में तेजी देखी गई है। भारतीय पीएम मोदी ने रूस की यात्रा के दौरान साफ कर दिया था कि मास्को और दिल्ली के बीच दोस्ती लगातार मजबूत बनी रहेगी। बाइडन प्रशासन ने डोनाल्ड ट्रंप के आने से पहले यह कड़ा कदम उठाकर नए अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भी मुसीबत बढ़ाई है जो लगातार यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए रूस से बातचीत पर जोर दिए हैं। पुतिन ने भी कहा है कि अगर ट्रंप मिलना चाहेंगे तो वह मुलाकात के लिए तैयार हैं। भारत ने भी बातचीत पर ही जोर दिया है।
