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Satyoday Samachar > Blog > टेक > भारतीय मूल का इंजीनियर बना Elon Musk का ‘इक्का’, जानिए आखिर कौन है Akash Bobba
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भारतीय मूल का इंजीनियर बना Elon Musk का ‘इक्का’, जानिए आखिर कौन है Akash Bobba

Satyoday Samachar
Last updated: February 4, 2025 4:10 pm
By
Satyoday Samachar
5 Min Read
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22 साल के भारतीय मूल के इंजीनियर आकाश बोब्बा (Akash Bobba) इन दिनों विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं. यह विवाद एलन मस्क (Elon Musk) द्वारा स्थापित ‘डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी’ (Department of Government Efficiency – DOGE) से जुड़ा है. इस सरकारी एजेंसी ने हाल ही में 19 से 24 वर्ष की उम्र के छह युवा इंजीनियरों को नियुक्त किया, जिनमें से एक आकाश बोब्बा भी हैं. यह नियुक्तियां चर्चा का विषय इसलिए बनी हैं क्योंकि इन युवा इंजीनियरों को सरकारी सिस्टम तक पहुंच दी गई है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम अनुभव वाले युवाओं को सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है. हालांकि, आलोचनाओं के बावजूद, बोब्बा का सफर एक शानदार कोडर से सरकारी एजेंसी के इनसाइडर तक बेहद प्रेरणादायक रहा है.

आकाश बोब्बा: एक होनहार टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट

DOGE में शामिल होने से पहले, आकाश बोब्बा ने टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई थी. उन्होंने यूसी बर्कले (UC Berkeley) के मैनेजमेंट, एंटरप्रेन्योरशिप और टेक्नोलॉजी (MET) प्रोग्राम में पढ़ाई की, जिसे भविष्य के टेक लीडर्स तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया है.

Meta में की इंटर्नशिप

अपने करियर के शुरुआती दौर में ही उन्होंने Meta, Palantir और Bridgewater Associates जैसी कंपनियों में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने AI, डेटा एनालिटिक्स और फाइनेंशियल मॉडलिंग में विशेषज्ञता हासिल की. लेकिन जो चीज उन्हें सबसे अलग बनाती है, वह है उनकी समस्या को हल करने की अद्भुत क्षमता और कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहने का कौशल.

सहपाठी ने शेयर की घटना

बोब्बा की प्रतिभा का एक बेहतरीन उदाहरण उनके बर्कले के दिनों से आता है. उनके एक सहपाठी चारिस झांग (Charis Zhang) ने एक घटना शेयर की, जिससे उनकी गहरी समझ और तेज़ कोडिंग स्किल्स का पता चलता है. झांग ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हम एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, और गलती से मैंने पूरी कोड फाइल डिलीट कर दी. मैं घबरा गया, लेकिन आकाश ने सिर्फ स्क्रीन की ओर देखा, कंधे उचका दिए, और एक ही रात में पूरी कोडिंग दोबारा लिख दी. पहले से भी बेहतर. हमने समय से पहले प्रोजेक्ट जमा किया और क्लास में पहला स्थान हासिल किया.’ इस तरह की कहानियों ने बोब्बा की छवि को और मजबूत किया, लेकिन उनकी नई सरकारी नियुक्ति पर अब कई सवाल उठ रहे हैं.

DOGE में युवा इंजीनियरों की नियुक्ति पर विवाद क्यों?

आकाश बोब्बा इकलौते युवा इंजीनियर नहीं हैं, जिन्हें मस्क की इस सरकारी एजेंसी में शामिल किया गया है. DOGE की टीम में कुल छह नए इंजीनियर शामिल किए गए हैं, जिनमें से कई हाल ही में ग्रैजुएट हुए हैं या फिर कॉलेज के छात्र हैं. इन सभी को सरकारी ईमेल और उच्च स्तरीय सुरक्षा क्लीयरेंस दिया गया है.

बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

आलोचकों का कहना है कि भले ही ये युवा बेहद प्रतिभाशाली हों, लेकिन इनमें से किसी के पास भी सरकारी या सार्वजनिक सेवा का अनुभव नहीं है. कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंता है कि इन युवा इंजीनियरों को जनरल सर्विस एडमिनिस्ट्रेशन (GSA) और ऑफिस ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट (OPM) जैसी एजेंसियों तक पहुंच मिलना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन नए इंजीनियरों में से कम से कम चार, जिसमें आकाश बोब्बा भी शामिल हैं. उनको टॉप-लेवल सिक्योरिटी क्लीयरेंस दिया गया है. इसका मतलब है कि उन्हें सरकारी IT इंफ्रास्ट्रक्चर और संवेदनशील डेटा तक सीधी पहुंच मिल गई है. आलोचकों का तर्क है कि इतनी उच्च स्तरीय सुरक्षा मंजूरी आमतौर पर सिर्फ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को दी जाती है, जो कई साल की जांच और अनुभव के बाद इस स्तर तक पहुंचते हैं. लेकिन अब यह युवा इंजीनियर सीधे इन महत्वपूर्ण सरकारी सिस्टम तक पहुंच बना रहे हैं.

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