डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा है कि वह ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए आर्थिक तरीके अपना सकते हैं या फिर सैन्य बल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ट्रंप का ग्रीनलैंड को खरीदना क्या संभव है।
हाइलाइट्स
- डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं ग्रीनलैंड को खरीदने की बात
- अमेरिका का क्षेत्र खरीदने का इतिहास काफी पुराना
- ग्रीनलैंड में प्राकृतिक संसाधनों की भरपूर संभावनाएं
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति
आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक महासागरों के बीच स्थित ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। भौगोलिक रूप से ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है। इसकी राजधानी नूक और न्यूयॉर्क में 2,900 किलोमीटर की दूरी है और ये कोपेनहेगन से पूर्व में 3,500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है। ग्रीनलैंड उन तीन क्षेत्रों में एक है, जो डेनमार्क और फरो आइलैंड्स के साथ मिलकर डेनिश साम्राज्य का निर्माण करते हैं।
अमेरिका ने 1921 में ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता की पुष्टि की थी। इसके बदले में डेनमार्क ने कैरिबियन में वर्जिन द्वीप समूह को 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर में अमेरिका को बेचने पर सहमति जताई थी। साल 1953 में ग्रीनलैंड की कानूनी स्थिति को डेनिश उपनिवेश से बदलकर डेनिश काउंटी किया गया। फिर 1979 में ग्रीनलैंड एक स्वशासी क्षेत्र बन गया। 2009 के बाद से ग्रीनलैंड को व्यापक स्वायत्तता और जनमत संग्रह के माध्यम से स्वतंत्रता की घोषणा करने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि डेनमार्क ही उसकी विदेशी, रक्षा और सुरक्षा नीतियों का प्रबंधन करता है।
अमेरिका ने खुद 1921 में ग्रीनलैंड पर डेनिश संप्रभुता को मान्यता दी थी लेकिन बहुत जल्द उसके विचार बदल गए। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के डेनमार्क पर आक्रमण के बाद 1941 में अमेरिका ने ग्रीनलैंड में सेना उतार दी थी। इसके बाद से अमेरिकी सेना का ग्रीनलैंड में स्थायी बेस है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1946 में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर में ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव रखा, जिसे डेनमार्क ने अस्वीकार कर दिया। हालांकि अमेरिका ने 1951 में उत्तरी अटलांटिक संधि (NATO) के तहत डेनमार्क के साथ रक्षा समझौता करते हुए ग्रीनलैंड में पहुंच बनाए रखी।
डोनाल्ड ट्रंप अब कह रहे हैं कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षाऔर ‘मुक्त दुनिया’ की रक्षा के लिए ग्रीनलैंड की आवश्यकता है। वह किसी भी सूरत में ग्रीनलैंड को चाहते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि ये बहुत आसान नहीं है। ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र बनने के लिए डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों से स्पष्ट स्वीकृति की जरूरत है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री फिलहाल ट्रंप के विचार से सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों की ओर से कहा गया है कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है।
ग्रीनलैंड और डेनमार्क के बीच 2009 के समझौते के तहत, ग्रीनलैंड जनमत संग्रह के माध्यम से स्वतंत्रता हासिल कर सकता है। अगर ऐसा होता है और ग्रीनलैंड स्वतंत्र हो जाता है तो फिर डेनमार्क समीकरण से बाहर हो जाएगा। ऐसी स्थिति में अमेरिका सीधे ग्रीनलैंड के साथ बात कर सकता है। ऐसे परिदृश्य में ग्रीनलैंड जनमत संग्रह पारित करने के बाद अमेरिका के साथ खुद को जोड़ना चुन सकता है। इस तरह वह अमेरिकी स्टेट बन जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वतंत्र होने के बाद भी ग्रीनलैंडवासी नहीं चाहेंगे कि वह डेनमार्क से निकलकर अमेरिका की छत्रछाया में आ जाएं। वह आजादी को कायम रखना चाहेंगे और अगर ग्रीनलैंडवासी किसी तरह अमेरिका का हिस्सा बनने के लिए सहमत हो गए तो भी ट्रंप के सामने एक चुनौती बचेगी। ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र बनने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के दो-तिहाई सदस्यों को संधि को मंजूरी देनी होगी। ऐसे में बहुत साफ है कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए ग्रीनलैंड को खरीदने और इसे अमेरिका का 51वां राज्य बनाना आसान नहीं होगा।
